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शहीद मेजर हरबंस सिंह चहल की जीवनी

शहीद मेजर हरबंस सिंह चहल ने गांव मोहनपुरा में 6 दिसम्बर 1938 को सरदार अवतार सिंह चडल - सरदारनी दलीप कौर के घर जन्म लिया। इनकी प्राईमरी तक की शिक्षा मोहनपुरा के स्कूल में पूरी हुई। डाई स्कूल की क्लास इन्होंने खालसा हाई स्कूल श्रीगंगानगर से 1956 में पास की। उस समय भी आप स्कूल के मशहूर और खास विद्यार्थियों में से एक थे। आपने बी. ए. की डिग्री बिरला आर्ट्स कॉलेज पिलानी से प्राप्त की। आप स्कूल और कॉलेज में एक बहुत ही उच्च श्रेणी के खिलाड़ी थे। सन् 1961 में बिरला आर्ट्स कॉलेज पिलानी में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किए गए। उसी साल कॉलेज यूनियन के वाईस प्रेजीडेंट भी रहे। सन् 1962 में आप यूथ होस्टल एसोसिएशन के वाईस प्रेजीडेंट भी चुने गए जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री श्री बरकतुल्ला खां प्रेजीडेंट थे। सन् 1963 में आपने एम. ए. एलएल. बी. में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया और उसी साल आप अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की कैबिनेट में मैंबर भी चुन लिए गए जो कि एक गैर मुस्लिम विद्यार्थी के लिए एक असंभव पद था। आपको राजस्थान यूनिवर्सिटी के एथेलेटिक्स चैम्पियन होने के नाते यूनिवर्सिटी कलर भी मिले। आप जब एम.ए..एलएल.बी. में थे तो ऐमरजेंसी कमीशन में चुन लिए गए। 8 फरवरी 1964 को इण्डियन मिल्ट्री एकेडमी देहरादून से कमीशन मिला और 1966 में रेगुलर कमीशन में जबलपुर से चुन लिए गए। सन् 1964 फरवरी से जुलाई 1965 तक गरनेडियर के रेजमेंटल सेंटर नसीराबाद में रहे। सेवा में जाने के बाद....

साहस और संकल्प की झलक

शहीद मेजर हरबंस सिंह चहल की निजी डायरी के अनमोल पन्नों में हमें एक सच्चे नायक की अदम्य भावना और अडिग संकल्प की झलक मिलती है। समय के साथ सुरक्षित ये हस्तलिखित शब्द उनके कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और राष्ट्र के प्रति उनके प्रेम को दर्शाते हैं। अपने शब्दों में, मेजर चहल ने "पूर्ण सफलता प्राप्त करने या युद्ध के मैदान में वीरतापूर्वक मरने" के अपने दृढ़ संकल्प को व्यक्त किया, जो उनके जीवन को परिभाषित करने वाले साहस और बलिदान को दर्शाता है। स्पष्टता और दृढ़ विश्वास के साथ लिखी गई ये डायरी प्रविष्टियाँ हमें उस निस्वार्थता की याद दिलाती हैं जिसके साथ उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान राष्ट्र के गौरव के लिए लड़ाई लड़ी थी। प्रत्येक शब्द एक सैनिक की बहादुरी से गूंजता है जिसने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी, प्रेरणा और सम्मान की विरासत छोड़ी।

शहीद मेजर हरबंस सिंह चहल की यादों की झलक

शहीद मेजर हरबंस सिंह चहल के जीवन और विरासत को तस्वीरों की इस चुनिंदा गैलरी के माध्यम से जानें। प्रत्येक तस्वीर वीरता, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की कहानी बयां करती है। वर्दी में गर्व के क्षणों से लेकर परिवार और साथियों के साथ यादों तक, ये तस्वीरें एक सच्चे देशभक्त के जीवन की झलक प्रदान करती हैं।

खेलों के प्रति मेजर चहल का समर्पण

Sports play a vital role in fostering discipline, teamwork, and resilience. Major Harbans Singh Chahal was not only a hero on the battlefield but also a firm believer in the power of sports to shape character and strengthen bonds. This section is dedicated to showcasing the vibrant sports culture that reflects his values of perseverance and determination. Through these images, we celebrate the joy, passion, and unity that sports bring to our lives, inspiring future generations to carry forward his legacy of excellence.

मेजर हरबंस सिंह चहल की जीवन गाथाएँ

हमारे द्वारा चुने गए ब्लॉगों के संग्रह के माध्यम से चहल चौक की दुनिया में कदम रखें। यहाँ, हम प्रेरणादायक कहानियाँ, ऐतिहासिक क्षण और विचारशील अंतर्दृष्टि साझा करते हैं जो शहीद मेजर हरबंस सिंह चहल के जीवन और विरासत का जश्न मनाते हैं। उनकी वीरता पर चिंतन से लेकर सामुदायिक पहलों पर अपडेट तक, हमारे ब्लॉग इस प्रतिष्ठित स्थल के अतीत, वर्तमान और भविष्य की झलक पेश करते हैं। उन कथाओं में गोता लगाएँ जो हमें बलिदान, देशभक्ति और लचीलेपन की भावना से जोड़ती हैं।

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